भारत में कृषि एक महत्वपूर्ण आर्थिक क्षेत्र है। यह न केवल हमारे देश की अर्थव्यवस्था का आधार है, बल्कि भारतीय समाज के सांस्कृतिक और पारंपरिक मूल्यों से भी गहरे जुड़े हुए हैं। बावजूद इसके, कृषि क्षेत्र को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें जलवायु परिवर्तन, सिंचाई की समस्या, उर्वरकों का अत्यधिक प्रयोग और खेती में आधुनिक तकनीक की कमी प्रमुख हैं। इस ब्लॉग में हम भारतीय कृषि की वर्तमान स्थिति, उसकी चुनौतियाँ और इन समस्याओं के समाधान ढूंढने के प्रयासों पर चर्चा करेंगे।

- भारतीय कृषि की वर्तमान स्थिति
भारत में कृषि क्षेत्र का जीडीपी में योगदान लगभग 18% है, और यह 50% से ज्यादा जनसंख्या को रोजगार देता है। हालांकि, कृषि उत्पादकता बढ़ रही है, लेकिन यह वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी गति से हो रही है। इसके परिणामस्वरूप, किसानों की आय में कोई खास सुधार नहीं हो रहा है, और वे आज भी कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं। कृषि में नई तकनीक, उन्नत बीज, और आधुनिक सिंचाई प्रणालियों का उपयोग कम हो रहा है। इसके अलावा, पारंपरिक कृषि पद्धतियाँ अब अपनी प्रभावशीलता खो चुकी हैं, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है और मुनाफा घट रहा है।
- जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
जलवायु परिवर्तन का असर भारतीय कृषि पर गहरे प्रभाव डाल रहा है। बेमौसम बारिश, सूखा, बर्फबारी, और तूफान जैसी घटनाएँ कृषि के उत्पादन को नष्ट कर सकती हैं। अधिक गर्मी और कम बारिश के कारण फसलों के लिए पानी की कमी हो रही है, जिससे उपज कम हो रही है। समाधान के रूप में, किसानों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल खेती तकनीकों और पानी बचाने के उपायों को अपनाने की आवश्यकता है। इसमें ड्रिप इरिगेशन, वर्षा जल संचयन, और सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियाँ शामिल हैं।
- सिंचाई की समस्या
भारत में अधिकतर कृषि बारिश पर निर्भर है, जबकि पूरे देश में सिंचाई का कवरेज बहुत कम है। अधिकांश किसान अपनी फसलों को मानसून के समय में ही उगाते हैं, और यदि बारिश का समय सही नहीं आता है, तो फसलों का नुकसान हो जाता है। इसी कारण, देश में सूखा और पानी की कमी का सामना करने वाले क्षेत्रों की संख्या बढ़ती जा रही है। ड्रिप इरिगेशन और पाइपलाइन आधारित सिंचाई प्रणालियाँ इस समस्या का समाधान कर सकती हैं, क्योंकि यह पानी की बर्बादी को कम करती हैं और फसलों के लिए पानी की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करती हैं।
- उर्वरकों का अत्यधिक प्रयोग
भारत में कृषि में रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक प्रयोग किया जाता है, जो पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। लगातार रासायनिक उर्वरकों का उपयोग मिट्टी की उर्वरता को खत्म कर सकता है, जिससे फसल उत्पादन में गिरावट आती है। सजग किसानों को जैविक उर्वरकों का प्रयोग करने की दिशा में कदम बढ़ाने की आवश्यकता है। जैविक उर्वरक न केवल मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखते हैं, बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुँचाते। इसके अलावा, किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य की जांच कराकर उर्वरक की सही मात्रा का प्रयोग करना चाहिए।
- कृषि में प्रौद्योगिकी का उपयोग
आज के समय में कृषि में प्रौद्योगिकी का उपयोग बेहद महत्त्वपूर्ण है। स्मार्ट कृषि, ड्रोन तकनीक, और एग्री-टेक इनोवेशन जैसी नई तकनीकों के द्वारा फसलों का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है और लागत कम की जा सकती है। दूरदर्शन और उपग्रह इमेजिंग द्वारा मौसम की भविष्यवाणी और फसलों के स्वास्थ्य पर निगरानी रखना अब संभव हो गया है। इसके अलावा, कृषि में रोबोटिक्स और ऑटोमेशन का उपयोग करके श्रमिकों की कमी को भी पूरा किया जा सकता है। इन तकनीकों का सही तरीके से उपयोग कर, भारतीय कृषि को एक नया दिशा दी जा सकती है।
- कृषि ऋण और सरकार की भूमिका
कृषि क्षेत्र के विकास के लिए सरकार की भूमिका अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है। किसानों को उचित मूल्य पर ऋण उपलब्ध कराना और उन्हें बीमा योजनाओं का लाभ दिलाना चाहिए। वर्तमान में, कई किसान अपनी फसलों के नुकसान के कारण कर्ज में डूब जाते हैं, जो उनकी स्थिति और भी खराब कर देता है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर उनकी फसलों का उचित मूल्य मिले और साथ ही कृषि ऋण की प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाया जाए।
- कृषि में महिला किसानों का योगदान
भारतीय कृषि में महिलाओं का योगदान बेहद महत्त्वपूर्ण है, बावजूद इसके कि उनका अधिकार और योगदान कम माना जाता है। महिला किसान खेतों में काम करती हैं, बुवाई से लेकर फसल काटने तक की सभी प्रक्रियाओं में शामिल रहती हैं। आवश्यक है कि सरकार और समाज महिलाओं को कृषि के हर पहलू में सशक्त बनाए, जैसे उन्हें प्रशिक्षण देना, तकनीकी शिक्षा प्रदान करना, और उन्हें कृषि ऋण एवं अन्य योजनाओं का लाभ दिलाना। महिलाओं के सशक्तिकरण से भारतीय कृषि को एक नया आयाम मिल सकता है।
- पारंपरिक कृषि पद्धतियों की पुनः शुरुआत
भारत में कृषि पद्धतियाँ सदियों पुरानी हैं। पारंपरिक पद्धतियाँ जैसे मिश्रित खेती, जैविक खेती, और फसल चक्रीकरण ने भारतीय किसानों को अपने संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग करने में मदद की है। हालांकि आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के कारण इन पद्धतियों की लोकप्रियता घट गई है, लेकिन यह महत्त्वपूर्ण है कि हम इन पारंपरिक पद्धतियों को फिर से बढ़ावा दें। ये पद्धतियाँ न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि किसानों के लिए स्थिर आय का स्रोत भी बन सकती हैं।
- कृषि का भविष्य
कृषि का भविष्य बहुत हद तक नई तकनीकों, सरकारी नीतियों, और पर्यावरणीय परिवर्तन पर निर्भर करेगा। यदि हम सही दिशा में काम करें और कृषि के क्षेत्र में बदलाव लाएँ, तो भारतीय कृषि को एक नई पहचान मिल सकती है। स्मार्ट कृषि, जैविक खेती, और जलवायु अनुकूल खेती जैसी पहलें भारतीय कृषि के भविष्य के लिए सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। इसके अलावा, किसानों को तकनीकी शिक्षा और प्रशिक्षण देने से वे अपने खेतों में नई-नई विधियों का उपयोग करने के लिए प्रेरित होंगे।

